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महामृत्युंजय का अर्थ

 महामृत्युंजय का वास्तविक अर्थ- मृत्यु के पूर्व महामृत्यु को जानना अति आवश्यक है। मृत्यु का अर्थ है शरीर का छूटना या शरीर का त्याग। इस संसार में अविनाशी आत्मा और परमात्मा के अलावा सब विनाशी है अर्थात सभी की मृत्यु निश्चित है। मृत्यु और महामृत्यु में क्या अन्तर है।  इस गहरे और गूढ़ रहस्य को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से समझने पर इसका अर्थ अत्यंत ही महत्वपूर्ण हो जाता है। मृत्यु शरीर की है फिर महामृत्यु किसकी है। जैसे काल और महाकाल। मृत्यु का सम्बंध काल से है तो महामृत्यु का सम्बंध महाकाल से है। श्रीमद्भगवद्गीता के 15वें अध्याय में भगवान कहते हैं कि मन सहित छह इंद्रियों आंख,कान,नाक,जिव्हा, और त्वचा के द्वारा ये शरीर भोग करता है और इन्ही के द्वारा पाप और पुण्य के आधार पर उसके संस्कार एक जन्म से दूसरे जन्म में वायु मार्ग द्वारा आत्मा में प्रविष्ट होकर मनुष्य को सुख और दुःख का अनुभव कराते हैं। इसी को ही अनुवांशिक सिद्धान्त कहा जाता है।  शैव सिद्धान्त के अनुसार यदि शरीर का सम्बन्ध मृत्यु(काल) से है तो उपरोक्त छह इंद्रियों का सम्बन्ध महामृत्यु (महाकाल) से है। श्रीमद्भगवद्गीता के बारहवे...