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Showing posts from August, 2020

वास्तु अनुसार प्रवेश द्वार और सुख -सम्पन्नता

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  सत्य सनातन संस्कार एवं शिक्षा संस्थान (रजि.) INDIA’S LEADING VAIDIC ONLINE INSTITUTE MOB- 9389118670    WHATSAPP-8318229946 EMAIL- satyasanatans5@gmail.com 117 /299 , M –BLOCK ,KAKADEV ,KANPUR 208005                                          DIRECTOR –ACHARYA (Dr.) Rahul Asthana वास्तु शास्त्र के सिद्धांत और उपाय ENTRANCE (मुख्य प्रवेश द्वार ) प्रवेश द्वार किसी भी घर का एक ऐसा स्थान है जहाँ से सभी प्रकार का आवागमन होता है | ऊर्जा का आवागमन सर्वाधिक रूप से प्रवेश द्वार से ही होता है अतः प्रवेश द्वार के बारे में वास्तु सम्मत जानकारी होना अति आवश्यक है |प्रवेश द्वार पर लगा हुआ आम की लकड़ी का स्वास्तिक आने वाले लोगों की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है | घर को बुरी नजर लगने से बचाता है | सुख -सम्रधि-सम्पन्नता तथा...

हमारा स्वास्थ्य और वास्तु

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  सत्य सनातन संस्कार एवं शिक्षा संस्थान (रजि.) INDIA’S LEADING VAIDIC ONLINE INSTITUTE MOB- 9389118670    WHATSAPP-8318229946 EMAIL- satyasanatans5@gmail.com 117 /299 , M –BLOCK ,KAKADEV ,KANPUR 208005                                          DIRECTOR –ACHARYA (Dr.) Rahul Asthana   वास्तु शास्त्र के सिद्धांत और उपाय वास्तुशास्त्र के अनुसार दिशाओं का ज्ञान होना अति आवश्यक है | मुख्यरूप से 8 दिशाओं तथा ब्रह्म स्थान का ज्ञान होने पर वास्तु दोषों से बचा जा सकता है | पुराने समय में घर के बाहर शौचालय की व्यवस्था होती थी तथा कुआँ आदि जल का स्त्रोत भी घर के बाहर हुआ करता था लोग किचन में जमीन में बैठकर भोजन करते थे   | घर के आगंन के मध्य अर्थात ब्रह्म स्थान पर तुलसी का पौधा होता था |   कच्ची मिटटी का ले...

जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण , माता त्रिपुर सुंदरी (श्री ) तथा श्री यंत्र का पूजन धनदायक होता है

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  सत्य सनातन संस्कार एवं शिक्षा संस्थान (रजि.) INDIA’S LEADING VAIDIC ONLINE INSTITUTE MOB- 9389118670    WHATSAPP-8318229946 EMAIL- satyasanatans5@gmail.com 117 /299 , M –BLOCK ,KAKADEV ,KANPUR 208005                                          DIRECTOR –ACHARYA (Dr.) Rahul Asthana श्री कृष्ण और श्रीविद्या की देवी त्रिपुर सुंदरी तथा श्री यंत्र (श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष)   भगवान् कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था | जन्म मथुरा में हुआ , शिक्षा उज्जैन में हुई हस्तिनापुर कर्मक्षेत्र रहा तथा द्वारिका में परमधाम को प्राप्त हुए | कहा जाता है की भगवान् कृष्ण 64 कलाओं से सम्पूर्ण थे इसी कारण उन्हें सम्पूर्ण जीवन का प्रतीक माना जाता है | शायद बहुत ही कम लोगों को ज्ञात होगा की भगवान् कृष्ण की प्रथम 16 कलाएं श्री क...

वार का महत्व

 वार का महत्व सप्तवारों का चयन सप्त ग्रहों के आधार पर किया गया है ।राहु केतू को छाया ग्रह होने के कारण वारों का आधिपत्य नही  दिया गया है। क्रमशः सूर्य ,चन्द्रमा ,मंगल,बुध,बृहस्पति, शुक्र ,शनि अपनी अपनी प्रकृति के आधार पर वारों के अधिपति हैं सूर्य से यश ,चन्द्रमा से  प्रेम,मंगल से पराक्रम,बुध से शिक्षा ,बृहस्पति से ज्ञान शुक्र से वैभव ,शनि से आयु का विचार होता है।

ग्रह नक्षत्र और औषधियां

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🌳🌿🌵🌱☘️🌴🍀🌲🎋🌾🌳  *सत्य सनातन संस्कार एवं शिक्षा संस्थान (रजि.)*  India's Leading  Vedik Online Institute आचार्य (डॉ.)राहुल अस्थाना 27 नक्षत्र,और उनके 27 पेड़ो के नाम* *12 राशि, और उनके 12 पेड़ों के नाम*   *9 ग्रह, और उनके 9 पेड़ों  के नाम* *(नक्षत्र राशि तथा ग्रह के लिए निर्धारित पेड़ पौधे) .............* प्रत्येक ग्रह और राशियों के अपने वृक्ष होते हैं। उसी तरह प्रत्येक नक्षत्र के भी अपने वृक्ष होते हैं।  अपने वृक्ष होने का अर्थ है कि ऐसे वृक्ष जिन पर उक्त ग्रहों का प्रभाव रहता है या जो उक्त ग्रह या नक्षत्रों के प्रतिनिधि होते हैं। यह भी कह सकते हैं कि उक्त ग्रह नक्षत्रों के कारण ही उक्त वृक्षों का जन्म होता है। इस पृथ्वी पर यदि वृक्ष न हो तो हमारा जीवन खतरे में पड़ जाएगा।  यह हम सभी जानते है वृक्ष हमें आक्सीजन प्रदान करता है और आक्सीजन के बिना मनुष्य जीवित नहीं रह सकता। इसी कारण वैदिक साहित्य में “वृक्ष पूजन” का स्पष्ट निर्देश दिया गया था जो आज भी विराजमान है ।वट वृक्ष की पूजा इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।  यदि कोई व्यक्ति बहुत परेशानी में है चाहे व...