वास्तु अनुसार प्रवेश द्वार और सुख -सम्पन्नता

 

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वास्तु शास्त्र के सिद्धांत और उपाय

ENTRANCE (मुख्य प्रवेश द्वार )

प्रवेश द्वार किसी भी घर का एक ऐसा स्थान है जहाँ से सभी प्रकार का आवागमन होता है | ऊर्जा का आवागमन सर्वाधिक रूप से प्रवेश द्वार से ही होता है अतः प्रवेश द्वार के बारे में वास्तु सम्मत जानकारी होना अति आवश्यक है |प्रवेश द्वार पर लगा हुआ आम की लकड़ी का स्वास्तिक आने वाले लोगों की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है | घर को बुरी नजर लगने से बचाता है | सुख -सम्रधि-सम्पन्नता तथा शांति हेतु प्रवेश द्वार व वास्तु उपयुक्त होना आवश्यक है |

दिशानुसार अपने घर के प्रवेश द्वार के अनुसार निम्न उपाय करके वास्तु दोषों से बचा जा सकता है ------------

1. पूर्व ,उत्तर ,उत्तर –पूर्व (ईशान कोण) मुखी वाले घरों को उत्तम माना गया है | ऐसे घरों में दैवीय उर्जा का संचरण स्वतः ही होता है | पूर्व में सूर्य ,उत्तर में हिमालय सहित कुबेर तथा उत्तर-पूर्व में देवताओं की उर्जा का वास होता है | अतः ऐसे घरों के मुख्य द्वार को हमेशा साफ रखना चाहिए | दरवाजे पर सजावट की सामग्री लगानी चाहिए |

 1. पूर्व ,उत्तर ,उत्तर –पूर्व मुखी वाले प्रवेश द्वारा को प्रातः कुछ समय के लिए 
       खोलकर रखना चाहिए |

2.     2.प्रवेश द्वार पर गन्दगी बिलकुल भी न हो |
 3.     काले अथवा नीले रंग का प्रयोग न करें |
4.     घर में सूरजमुखी का पौधा पूर्व दिशा की और लगाना अति शुभ होता है |
 

2. दक्षिण या दक्षिण पूर्व (आग्नेय) मुखी वाले घरों में अग्नि तत्व की प्रधानता होती है तथा इसमें रहने वाले लोग अक्सर गरम स्वभाव के देखे गए हैं | इन घरों में रोग तथा ऋण की संभावनाएं अधिक होती हैं | धन की फिजूल खर्ची होती है | बचत नहीं होती है | पारिवारिक कलह होती रहती है | चुम्बकीय तत्व होता है |                    निवारण

     1.     प्रवेश द्वार पर लाल + पीले रंग का प्रयोग करना चाहिए |
2.     मुख्य द्वार पर हनुमान जी की फोटो लगाना लाभदायक होता है |
3.     घर में कभी भी हवन की राख ,भभूत आदि नहीं रखनी चाहिए |
4.     घर में shungite नामक stone रखें 

3.पश्चिम तथा दक्षिण पश्चिम (नैरव्य) मुखी वाले घर पूर्वज प्रधान होते हैं | पैतृक ऊर्जा का वास होता है | मूलों में जन्म होता है | शनि ग्रह बली होता है | इंजीयरिंग क्षेत्र के लोगों के लिए या तकनीकी क्षेत्र के लिए शुभ होता है | पितृदोष की संभावना अधिक होती है |

निवारण -

     1.     अमावस्या पर किसी गरीब को भोजन अवश्य कराएँ |
2.     अपने पैत्रक स्थान की मिटटी लाकर अपने गमले में डालें |
3.     प्रवेश द्वार पर शमी का पौधा लगाएं |
4.     घर की पूर्व दिशा पर सूर्य यंत्र अवश्य लगाएं |
5.     प्रवेश द्वार पर काले घोड़े की नाल लगाएं | (U आकार में )

4.उत्तर -पश्चिम (वायव्य कोण ) मुखी वाले वायु प्रधान होते हैं | आपसी संबंधों की प्रगाढ़ता हेतु ये दिशा अत्यंत ही महत्वपूर्ण है | यदि प्रवेश द्वार गन्दा ,कूड़ा-करकट ,कबाड़ आदि वाला होगा तो आपसी सम्बन्ध खराब होंगे |घर से बाहर रहना अधिक पसंद होगा |

 निवारण -

     1.     घर की छत या बालकनी पर पीला झंडा लगायें |
2.     मुख्य दरवाजे पर दो बांसुरी क्रास करके लटका दें |
3.     प्रवेश द्वार पर काले घोड़े की नाल लगाएं | (U आकार में )

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