वास्तु अनुसार प्रवेश द्वार और सुख -सम्पन्नता
सत्य सनातन संस्कार एवं शिक्षा संस्थान (रजि.)
INDIA’S LEADING VAIDIC ONLINE
INSTITUTE
MOB- 9389118670 WHATSAPP-8318229946
EMAIL- satyasanatans5@gmail.com
117 /299, M –BLOCK ,KAKADEV ,KANPUR 208005
DIRECTOR
–ACHARYA (Dr.) Rahul Asthana
वास्तु शास्त्र के सिद्धांत और उपाय
ENTRANCE
(मुख्य प्रवेश द्वार )
प्रवेश द्वार किसी भी घर का एक ऐसा स्थान है जहाँ से सभी प्रकार का आवागमन होता है | ऊर्जा का आवागमन सर्वाधिक रूप से प्रवेश द्वार से ही होता है अतः प्रवेश द्वार के बारे में वास्तु सम्मत जानकारी होना अति आवश्यक है |प्रवेश द्वार पर लगा हुआ आम की लकड़ी का स्वास्तिक आने वाले लोगों की नकारात्मक ऊर्जा को नष्ट करता है | घर को बुरी नजर लगने से बचाता है | सुख -सम्रधि-सम्पन्नता तथा शांति हेतु प्रवेश द्वार व वास्तु उपयुक्त होना आवश्यक है |
दिशानुसार अपने घर के प्रवेश द्वार के अनुसार निम्न उपाय करके वास्तु दोषों से बचा जा सकता है ------------
1. पूर्व ,उत्तर ,उत्तर –पूर्व (ईशान कोण) मुखी वाले घरों को उत्तम माना गया है | ऐसे घरों में दैवीय उर्जा का संचरण स्वतः ही होता है | पूर्व में सूर्य ,उत्तर में हिमालय सहित कुबेर तथा उत्तर-पूर्व में देवताओं की उर्जा का वास होता है | अतः ऐसे घरों के मुख्य द्वार को हमेशा साफ रखना चाहिए | दरवाजे पर सजावट की सामग्री लगानी चाहिए |
1. पूर्व ,उत्तर ,उत्तर –पूर्व मुखी वाले प्रवेश
द्वारा को प्रातः कुछ समय के लिए
खोलकर रखना चाहिए |
2. 2.प्रवेश द्वार पर गन्दगी बिलकुल भी न हो |
3.
काले अथवा नीले रंग का प्रयोग न करें |
4.
घर में सूरजमुखी का पौधा पूर्व दिशा की और लगाना
अति शुभ होता है |
2. दक्षिण या दक्षिण पूर्व (आग्नेय) मुखी वाले
घरों में अग्नि तत्व की प्रधानता होती है तथा इसमें रहने वाले लोग अक्सर गरम
स्वभाव के देखे गए हैं | इन घरों में रोग तथा ऋण की संभावनाएं अधिक होती हैं | धन
की फिजूल खर्ची होती है | बचत नहीं होती है | पारिवारिक कलह होती रहती है |
चुम्बकीय तत्व होता है | निवारण
1. प्रवेश द्वार पर लाल + पीले रंग का
प्रयोग करना चाहिए |
2. मुख्य द्वार पर हनुमान जी की फोटो
लगाना लाभदायक होता है |
3. घर में कभी भी हवन की राख ,भभूत आदि
नहीं रखनी चाहिए |
4. घर में shungite नामक stone रखें
3.पश्चिम तथा दक्षिण पश्चिम (नैरव्य) मुखी वाले घर पूर्वज प्रधान होते हैं |
पैतृक ऊर्जा का वास होता है | मूलों में जन्म होता है | शनि ग्रह बली होता है |
इंजीयरिंग क्षेत्र के लोगों के लिए या तकनीकी क्षेत्र के लिए शुभ होता है |
पितृदोष की संभावना अधिक होती है |
निवारण -
1. अमावस्या पर किसी गरीब को भोजन अवश्य
कराएँ |
2. अपने पैत्रक स्थान की मिटटी लाकर अपने
गमले में डालें |
3. प्रवेश द्वार पर शमी का पौधा लगाएं |
4. घर की पूर्व दिशा पर सूर्य यंत्र
अवश्य लगाएं |
5. प्रवेश द्वार पर काले घोड़े की नाल
लगाएं | (U आकार में )
4.उत्तर -पश्चिम (वायव्य कोण ) मुखी वाले वायु प्रधान होते हैं | आपसी संबंधों की प्रगाढ़ता हेतु ये दिशा अत्यंत ही महत्वपूर्ण है | यदि प्रवेश द्वार गन्दा ,कूड़ा-करकट ,कबाड़ आदि वाला होगा तो आपसी सम्बन्ध खराब होंगे |घर से बाहर रहना अधिक पसंद होगा |

Comments
Post a Comment