शिव तत्व रहस्य(गंगा जी और ब्रह्मरन्ध्र)
शिव तत्व रहस्य
आप सभी शिव भक्तों को श्रावण मास की हार्दिक शुभकामनाएं ।
आज पुनः हम अपनी सूक्ष्म बुद्धि और परमात्मा की कृपा से शिव तत्व के एक अन्य रहस्य पर प्रकाश डालेंगे।
शिव पुराण में कहा गया है शिवजी की जटाओं में जो गंगा जी स्थापित हैं वो स्थान वास्तव में भगवान शिव के सिर का मध्य स्थान है । सिर का मध्य स्थान सहस्रार चक्र या ब्रह्मरंध कहलाता है।
कभी आपने देखा होगा कि शिशु के सिर का मध्य भाग अत्यंत कोमल होता है और उसमें गड्ढा भी पड़ने लगता है इसका अर्थ है वो स्थान इसलिए कोमल है कि उसमें ब्रह्म की असीम शक्ति स्थित है इसी कारण वो ब्रह्मरन्ध्र है। इसे ब्रह्म का छिद्र या ब्रह्म का मार्ग भी कहा जाता है। जैसे जैसे वो शिशु बड़ा होता है वैसे वैसे माया के वशीभूत होकर संसार मे लिप्त होता जाता है जिससे सिर के मध्य स्थान की कोमलता कठोरता में बदल जाती है और ब्रह्म मार्ग बंद हो जाता है।
परम् पिता परमेश्वर भगवान शंकर ने अपने उसी ब्रह्मरन्ध्र पर माँ गंगा को स्थापित कर सम्पूर्ण जगत को ये संदेश दिया है कि यदि मनुष्य अपने अंदर गंगा के समान पवित्रता ,शुद्धि और मोक्ष की भावना रखता है तो उसका ब्रह्म मार्ग कभी बंद नही होगा और वो शिव तत्व की प्राप्ति का अधिकारी होगा।
जो लोग नित्य गंगा जी मे स्नान करते हैं उनके सिर का मध्य भाग अर्थात ब्रह्मरन्ध्र शिव तत्व की ऊर्जा को प्राप्त करने लग जाता है।
शिवलिंग पर गंगाजल चढ़ाने से शिव भक्त का ब्रह्मरन्ध्र भगवान शिव से जुड़ने लग जाता है।
गंगाजल से किया हुआ अभिषेक आध्यात्मिक उन्नति देता है।
जय महादेव👏
आचार्य राहुल अस्थाना
ज्योतिषाचार्य व आध्यात्मिक मर्मज्ञ
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