हमारा स्वास्थ्य और वास्तु

 

सत्य सनातन संस्कार एवं शिक्षा संस्थान (रजि.)

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वास्तु शास्त्र के सिद्धांत और उपाय

वास्तुशास्त्र के अनुसार दिशाओं का ज्ञान होना अति आवश्यक है | मुख्यरूप से 8 दिशाओं तथा ब्रह्म स्थान का ज्ञान होने पर वास्तु दोषों से बचा जा सकता है | पुराने समय में घर के बाहर शौचालय की व्यवस्था होती थी तथा कुआँ आदि जल का स्त्रोत भी घर के बाहर हुआ करता था लोग किचन में जमीन में बैठकर भोजन करते थे  | घर के आगंन के मध्य अर्थात ब्रह्म स्थान पर तुलसी का पौधा होता था |  कच्ची मिटटी का लेप होता था | मुख्यत इन्ही कारणों से वास्तु दोष का निवारण स्वतः ही हो जाया करता था |

वास्तु की आवश्यकता आज अधिक पड़ने लगी क्योंकि घर छोटे हो गए ,TOILET बेडरूम से जुड़ गए | ब्रह्म स्थान समाप्त हो गया| कच्ची मिटटी का लेप होता नहीं है,  किचन में बैठकर खाना खाना बंद हो गया है, चौखट समाप्त हो गई है इन्ही मुख्य कारणों से ही वर्तमान समय में वास्तु के नियमो को जानकर जीवन यापन करना आवश्यक हो गया है |

मुख्य वास्तु बिंदु -

 1.     आम की लकड़ी का स्वास्तिक रोली तथा नागकेशर से रंग कर प्रवेश द्वार पर लगाना चाहिए |
2.     कभी भी प्रवेश द्वार में गणेश जी की फोटो या मूर्ति नहीं लगानी चाहिए | हमेशा दरवाजे के पीछे लगानी चाहिए |
3.     दक्षिण भारत के घरों में प्रवेश द्वार पर नित्य रंगोली बनाने का रिवाज है |
4.     जैसा होगा अन्न वैसा होगा तन –मन ,जैसा होगा पानी वैसी होगी वाणी और जैसी होगी पूजा वैसी मिलेगी ऊर्जा |
5.मुख्य प्रवेश द्वार साफ सुथरा होना चाहिए |

बीमारी की जड़ दो हैं पेट और दिमाग |

घर में पेट का सम्बन्ध किचन और टॉयलेट से है अर्थात input और output अच्छा होना चाहिए |

यदि किचन का वास्तु सही है खाना पचने की ऊर्जा मिलेगी और भोजन पौष्टिक होगा | साथ ही शौचालय यदि सही स्थान पर है तो पेट की सफाई अछे से होगी और अनेक बीमारियों से बचाव स्वतः ही हो जायेगा |

किचन का वास्तु

किचन एक ऐसा स्थान है जहाँ पर ऊर्जा अग्नि और जल के माध्यम से संचरित होती है किचन का सही स्थान दक्षिण –पूर्व है अर्थात आग्नेय  कोण है इसके उपरांत उत्तर –पश्चिम (वायव्य कोण ) होता है |

उत्तर –पूर्व में बना हुआ किचन अधिक नुकसानदायक होता है क्योंकि इससे आपका पूजाघर और रसोईघर (किचन) दोनों ही ख़राब होते हैं और नकारात्मक  ऊर्जा का संचरण करते हैं | राहु ग्रह के कारण स्वास्थ्य तथा धन सम्बन्धी समस्याएं आती हैं | खाना बनाने वाले का मुख पूर्व या दक्षिण की ओर होना चाहिए |

उपाय –

1.     किचन में अन्नपूर्णा माता की फोटो रखें |
2.     किचन में नमक युक्त जल रखें |
3.     किचन में पिरामिड रखें |
4.     प्रसन्न मुद्रा में भोजन इत्यादि बनायें |
5.     किचन में बैठकर भोजन करें |
6.     गुथा हुआ आटा फ्रिज या किचन में रात्रि में कदापि न रखें |

स्नानघर तथा टॉयलेट

किसी भी घर में toilet का स्थान पूर्व ,उत्तर या उत्तर-पूर्व (N-E) में नहीं होना चाहिए  TOILET का सही स्थान पश्चिम ,दक्षिण-पश्चिम होता है |

टॉयलेट में कभी भी NEWSPAPER नहीं पढ़ना चाहिए | शौचालय के ऊपर कभी भी पूजाघर नहीं होना चाहिए | कमोड पर बैठने वाले का मुख उत्तर या दक्षिण की और होना चाहिए |

निवारण

बाहर की ओर दरवाजे पर शिकार करते हुए शेर का चित्र लगाएं |
बाहर कांच के BOWL में खड़ा नमक भरकर रखें |

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