अंक ज्योतिष 0 का आध्यात्मिक महत्त्व
अंक ज्योतिष में जीरो (शून्य) का अंक महत्वपूर्ण नही है परन्तु आध्यात्मिक द्रष्टि से ये भी अत्यंत महत्वपूर्ण है यद्यपि जीरो की कीमत कुछ नहीं रखी गई लेकिन फिर भी जीरो जिस ग्रह के जिस अंक के आगे लग जाता है उसकी VALUE अर्थात कीमत 10 गुना बढ़ा देता है इसलिए हम इस पहली क्लास में जीरो से लेकर 9 अंक तक पढेंगे |
अंक ज्योतिष का आधार मुख्य रूप से 1
से लेकर 9 तक अंक हैं।जिस प्रकार से
वैदिक ज्योतिष में 12
राशियां 27 नक्षत्र और नौ ग्रहों का अत्यंत ही महत्व है उसी प्रकार से
अंक ज्योतिष में 1 से लोग लेकर 9
तक के अंको का महत्व है प्रत्येक अंक किसी
न किसी ग्रह से संबंधित है । अंक ज्योतिष का मुख्य आधार यधपि मूलांक है परंतु
मूलांक को समझने के पूर्व ये जानना अति आवश्यक है कि 0
से 9
तक के अंक क्रमशः किस प्रकार इस सृष्टि से सम्बन्ध रखते है।
अंक शून्य ZERO
अंक या
संख्या का शब्द एवं क्रिया से घनिष्ठ संबंध है 0 अर्थात
शून्य निराकार ब्रह्म या अनंत का प्रतीक है शून्य से सृष्टि की उत्पत्ति हुई है
एवं शून्य में ही सब कुछ विलीन हो जाता है यह शून्य सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर एवं वृहद से वृहदकर है। हम जब भी अपनी दृष्टि चारों ओर घुमाएंगे तो
हमें सब कुछ गोल-गोल ही दिखाई देगा यह गोल ही तो विश्व है आकाश पृथ्वी वायु जल
अग्नि सभी कुछ गोलाकार है हमारे शरीर में स्थित विभिन्न द्वार भी गोलाकार रूप में
है इसलिए शून्य की शक्ति सबसे बड़ी शक्ति
है और इस शून्य को हमारे ऋषि-मुनियों ने खोजा जिसे आज पूरा विश्व मान रहा है शून्य से ही श्रेष्ठ
की उत्पत्ति हुई और सृष्टि एक कहलाई अर्थात इस सृष्टि को संचालित करने वाली कोई एक
शक्ति है जो अदृश्य है |
वही निराकार शक्ति ही विधि पूर्वक इस सृष्टि
का संचालन कर रही है इसे ही ब्रह्म की
संज्ञा दी गई इस प्रकार आप देखेंगे कि शून्य वास्तव में निराकार ब्रह्म है ।

Very nice information
ReplyDeleteThanx
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