श्रावण मास में ग्रह युति अनुसार कैलाश पर्वत पर दिव्य शिव शक्ति मिलन का अर्धनारेश्वर योग मुहूर्त
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||ॐ नमः शिवाय ||
श्रावण मास की
पूर्णमासी और ग्रहों के अनुसार भगवान का अर्धनारीश्वर स्वरूप
इस वर्ष श्रावण मास की पूर्णमासी
3 अगस्त 2020 दिन सोमवार को मनाई जाएगी परन्तु ग्रह-नक्षत्रो के समीकरण के अनुसार
2 अगस्त 2020 दिन रविवार को रात्रि 9 बजकर 40 मिनट पर चतुर्दशी समाप्त होकर
पूर्णिमा का उदय हो जायेगा जब सूर्य और चंद्रमा क्रमशः मकर और कर्क राशि में एक
दूसरे के सम्मुख होंगे | मकर राशि में चंद्रमा का प्रवेश जहाँ पहले से ही शनिदेव
विराजमान हैं ,एक दिव्य योग का निर्माण करेगा | लेख के अन्त में विस्तृत रूप से
समय की गणना की गई है |लेकिन इस योग और मुहूर्त को जानने के पहले 12 राशियों में
मकर तथा कर्क राशि एवं 9 ग्रहों में चंद्रमा तथा शनि को समझना अति आवश्यक है
|
1.शनि
और शिव में समानता 2. कर्क और मकर
राशि का स्वरूप
3.शनि
और चंद्रमा का स्वरूप
भगवान शिव और शनि में समानता
नाड़ी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार आध्यात्मिक
द्रष्टिकोण से चंद्रमा को माता पार्वती तथा शनि को भगवान शिव कहा गया है | देवताओं
में भगवान शिव को महाकाल ,महायोगी तथा देवताओं का इश्वर कहा गया है ठीक उसी प्रकार
ग्रहों में शनि को न्यायकर्ता ,महायोगी कर्मधिकारी तथा काल की संज्ञा दी गई है |
महादेव की तीसरी द्रष्टि के समान ग्रहों में शनि की भी तीसरी द्रष्टि है | महाकाल
के रूप में शिव का रूप काला है तो ग्रहों में न्यायकारक शनि का रूप भी काला है | देवताओं
में महादेव को महायोगी तथा ग्रहों में शनि को महायोगी कहा गया है |
काल पुरुष की कुंडली के अनुसार
दशम भाव की मकर राशि शनि की राशि है तथा ठीक उसके सम्मुख की कर्क राशि चंद्रमा की
है | ज्योतिष में चंद्रमा को माता माना गया है | इस प्रकार माता पार्वती की राशि कर्क
तथा महादेव शिव की राशि मकर है |
मकर राशि को प्रथ्वी ,पहाड़ और पत्थरों की राशि
कहा जाता है जो कैलाश पर्वत का प्रतीक हैं | प्राचीन ग्रंथों में मकर राशि के
चिन्ह के रूप में पहाड़ के शिखर पर काले बकरे को दिखलाया गया है | कर्क राशि दशम
भाव रुपी कैलाश पर्वत के सम्मुख की राशि होने के कारण कैलाश पर्वत की तलहटी के रूप
में चंद्रमा अर्थात माता पार्वती की राशि है |
-ग्रहों में शनि एवं चंद्रमा ही महादेव और महादेवी हैं -
नाड़ी ज्योतिष astrology का आध्यात्मिक स्वरूप है इसके अनुसार शनि शिव हैं तो चन्द्रमा माता पार्वती | दोनों का रौद्ररूप ही महाकाल और महाकाली है | ग्रह चाल के अनुसार शिव रुपी शनि तथा पार्वती रुपी चंद्रमा की ढाई चाल है | शनि एक राशि में ढाई वर्ष तथा चंद्रमा एक राशि में ढाई दिन व्यतीत करते हैं | जन्मपत्री में पार्वती रुपी चंद्रमा से ही शिव रुपी शनि की साढ़े साती ,ढय्या तथा दशाओं आदि का ज्ञान किया जाता है अन्य शब्दों में घटनाएं यदि भगवान शिव (शनि ) हैं तो घटनाओं का समय माता पार्वती (चंद्रमा ) हैं |
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रह
चलायमान हैं तथा अपनी गति अनुसार एक दूसरे से मिलते हुए आगे बढ़ते हैं इसी श्रंखला
में जब शनि और चंद्रमा एक ही राशि में एक साथ मिलते हैं तब इसे विष योग कहा गया है
परन्तु शनि रुपी शिव और चंद्रमा रुपी पार्वती के मिलने से इसे अर्धनारीश्वर योग भी
कहा गया | कुछ ग्रंथों में इसे चन्द्र –मौलि योग भी कहा गया है | इस प्रकार शनि –चंद्रमा
की युति ही शिव शक्ति अर्थात अर्धनारीश्वर भगवान का रूप है |
ग्रह युति अनुसार कैलाश पर शिव –पार्वती मिलन अर्थात अर्धनारीश्वर योग
(अर्धनारीश्वर योग 2 अगस्त दोपहर 1:00 से 4 अगस्त रात्रि 8:40 तक)
विशेष कालखंड की बात करें तो मकर
राशि (कैलाश पर्वत ) पर शिव रुपी शनि 3 अंश 34
कला तथा 39 विकला पर स्थित हैं | 2 अगस्त 2020 दिन रविवार रात्रि
8 बजकर 28 मिनट से 8 बजकर 29 मिनट (2 मिनट ) पार्वती रुपी चंद्रमा की स्थिति 3 अंश 34 कला
10 विकला से 3 अंश 34 कला तथा 43 विकला पर रहेगी | इसी 2 मिनट (2 अगस्त
2020 रविवार रात्रि 8:28 से 8:29 तक )में ग्रह गति
अनुसार कैलाश पर्वत पर माता पार्वती का भगवान शिव से मिलन होगा अर्थात शक्ति का
प्रवेश शिव में होगा और बनेगा पूर्ण अर्धनारीश्वर योग |
यधपि इस प्रकार का एक योग 14
अगस्त 1932 को भी बना था परन्तु उसमे देव गुरु ब्रहस्पति अपनी राशि में नहीं थे
तथा चन्द्रमा के आगे राहु स्थित थे जिसके कारण कुम्भ में चंद्रमा पीड़ित हो गए और
शिव शक्ति के मिलन का लाभ जनमानस को नहीं मिल पाया |
इस योग की विशेषता यही है की इसके
पूर्व इतने शुद्ध योग की पुष्टि नही है क्योंकि इस वर्ष मकर राशि में शनि अकेले
हैं तथा देव गुरु ब्रहस्पति अपनी पिछली राशि धनु में स्थित हैं जिसमे से होकर
चन्द्रमा रुपी माता पार्वती गजकेशरी योग का निर्माण करते हुए अपने पति महादेव से मिलने आ रही हैं साथ ही अगली लाभ राशि कुम्भ
पर कोई भी ग्रह नही है अतः इससे शुभ मुहूर्त नही हो सकता |
1.
2 अगस्त को रात्रि 8 बजे से 8:25 के मध्य घर के
पूजाघर में घी का दीपक जलाकर अर्धनारेश्वर स्त्रोत का एक पाठ तथा एक माला निम्न
मन्त्र का जप करना है |
।। ॐ ह्रौं ह्रीं अर्धनारेश्वराये ह्रीं नमः ।।
Om Whraum Whreem Ardhnareshvrayey Whreem Namah
2.
रात्रि 8:25 से 8:30 बजे तक भगवान के अर्धनारेश्वर स्वरूप
का ध्यान करते हुए उपरोक्त मन्त्र का मानसिक जप करना है |
सौजन्य से - आचार्य (डा.) राहुल अस्थाना
ज्योतिषाचार्य व् वास्तु तथा हीलिंग सलाहकार
9389118670 ,8318229946

Very nice message.
ReplyDeleteVery nice
ReplyDeleteThanx
ReplyDeleteबहुत ही सुंदर जानकारी
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