अधिक मास या पुरषोत्तम मास साधना

18 सितम्बर से 16 अक्तूबर 2020 
सत्य सनातन संस्कार एवं शिक्षा संस्थान (रजि.)

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अधिक मास अर्थात पुरषोत्तम मास का महत्व

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सौर वर्ष 365 दिन तथा चन्द्र वर्ष 355 दिनों का होता है जिसके कारण प्रति वर्ष दोनों में 10 दिन का अंतर आता है | इन दोनों वर्षों के सामजस्य हेतु प्रत्येक तीसरे वर्ष एक अधिक मास एवं प्रत्येक 141 वर्ष में चन्द्र क्षय मास का प्रावधान किया गया है | अन्य शब्दों में सूर्यदेव और चन्द्र देव के मध्य संतुलन स्थापित करने हेतु अधिक मास बनाया गया है |

 जिस मास में कोई भी सूर्य संक्रांति न पड़े उसे अधिक मास की संज्ञा दी गई है तथा जिस मास में दो सूर्य संक्रांति पड़ जाएँ उसे क्षय मास कहा जाता है |

अधिक मास और क्षय मास को ही मलमास  कहा जाता है |

 पौराणिक द्रष्टिकोण से अधिक मास का नाम भगवान् विष्णु के नाम पर पुरषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है | समायोजित मास होने के कारण इस मास के अपने कोई भी देवता नहीं हैं इसी कारण से इस मास में शुभ कार्य जैसे –विवाह ,मुंडन, ग्रह-प्रवेश ,कर्ण छेदन आदि वर्जित होते हैं |

 अधिक मास में किये हुए जप –अनुष्ठान तथा पूजन का फल कई गुना प्राप्त होता है तथा आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है |

 इस वर्ष अधिक मास 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक रहेगा | इस समय का सदुपयोग करने से ईश्वरीय कृपा प्राप्त होती है तथा पूर्व जन्मों के कर्मो से उत्पन्न दोषों का निवारण भी होता है |

पुरषोत्तम मास साधना –

पुरषोत्तम मास अर्थात 18 सितम्बर से 16 अक्टूबर तक सभी साधकों को भगवान् विष्णु ,शिव जी ,माता त्रिपुर सुंदरी आदि जो जिसके इष्ट देव या देवी हों उनकी नियमित मन्त्र जप साधना करनी चाहिए | जो भी मन्त्र अपने गुरु से प्राप्त हुआ हो उसका नित्य पूर्ण मनोयोग से जप करना चाहिए | शंख का पूजन अवश्य करना चाहिए |

पुरषोत्तम मास की एकादशी तथा पूर्णिमा को दान- पुण्य करना चाहिए | इन दिनों में सत्य नारायण की कथा सुनने से अधिक लाभ मिलता है |

अधिक मास में श्री राम व कृष्ण कथा श्रीमद्भागवत कथा श्रवण ,श्री विष्णु सहस्त्रनाम
श्री सूक्त ,पुरुष सूक्त हरिवंश पुराण अथवा गुरु द्वारा दिया गया मन्त्र जप करना चाहिए |

सौजन्य से  –

Acharya (Dr.) Rahul Suresh Chandra Asthana
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