अंक ज्योतिष और मस्तिष्क विकास
सत्य सनातन संस्कार एवं
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–ACHARYA (Dr.) Rahul Asthana
अंक ज्योतिष व मस्तिष्क विकास
वैज्ञानिक शोध के अनुसार ये सिद्ध हो चुका है कि व्यक्ति की सोच और विचारधारा
पर मस्तिष्क के विशेष भागों का प्रभाव और नियंत्रण होता है | हमारा मस्तिष्क दो
भागों में विभक्त होता है | बायाँ गोलार्द्ध तथा दायाँ गोलार्द्ध | यही मस्तिष्क बाह्यमुखी
और अंतर्मुखी बनाता है |
इसी प्रकार जिन लोगों का मूलांक 1,3,4,5,व 9 होता है उनके
मस्तिष्क का दायाँ गोलार्द्ध अधिक विकसित होता है | ये लोग किसी भी काम को सवयम
करने में अधिक विश्वास करते हैं | कार्यों को टालना इनकी प्रवत्ति नहीं होती है |
धन कमाने की लालसा हमेशा रहती है | ये लाग भावुक होते हुए भी ह्रदय से अधिक बुद्धि
से काम लेते हैं |
इसी प्रकार जिनका जन्म वृष ,कर्क व मकर की संक्रांति में हुआ हो वे भी मस्तिष्क के बाएं भाग को अधिक प्रयोग करते हैं |
शेष संक्रांतिमें जन्म होने पर मस्तिष्क के दाहिने भाग का प्रयोग अधिक होता है |
मस्तिष्क विचार के समय 4 व 7 अंक को राहु तथा केतू नहीं
माना गया है | इसे क्रमशा सूर्य व चंद्रमा माना गया है तह जिनका मूलांक 4 अथवा 7
हो वे अपने सूर्य अथवा चंद्रमा को अवश्य मजबूत करें |
दान के सम्बन्ध में जिनका मूलांक 2,6,7 व 8 हो उन्हें बाएं
हाँथ से व 1,3,4,5 व 9 मूलांक वालों को हमेशा दाहिने हाथ से ही दान करना चाहिए |

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