शिव तत्व का रहस्य( अघोरी की व्याख्या)

 🧚शिव तत्व रहस्य🧚

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भगवान शिव के लिए एक शब्द प्रयोग हुआ है "अघोर"

सामान्य रूप से अघोर का अर्थ श्मशान में रहने वाला,तांत्रिक,भयानक,

कठिन आदि माना जाता है।

भगवान को इसीलिए अघोरी कहा जाता है और अघोरी रूप मस्तिष्क में आते ही भगवान का विकराल रूप सामने आ जाता है जबकि अघोर शब्द की ये धारणा पूर्णतः गलत और निरर्थक है।

जबकि अघोर का शाब्दिक अर्थ है जो घोर अर्थात भयंकरता से अलग होकर सहज और सरल हो। जो घोर से भी घोर पापों से मुक्त हो।जिसने अपनी इद्रियों पर विजय प्राप्त कर ली हो तथा जो हर स्थिति में शान्त हो वो अघोर है।

भगवान शिव का अघोर रूप पंच आध्यात्मिक अवतारों में शिव कल्प में लिया हुआ चतुर्थ आध्यात्मिक अवतार है जिसका रंग घने काले बादलों के समान काला है और जिसकी दिशा दक्षिण है। भगवान के पंचमुखी शिवलिंग जो पशुपति नाथ के नाम से जाना जाता है उसमे दक्षिण दिशा का मुख अघोर अवतार का है जो पूर्णतः सहज,सरल और ज्ञान से परिपूर्ण है जिसके द्वारा  भगवान ने समस्त सृष्टि कोअथर्वेद का ज्ञान दिया है। 


ये शुद्ध आध्यात्मिक ज्ञान भगवान के अघोर अवतार के द्वारा ही प्राप्त हुआ है। 

जो हर किसी से प्रेम करे,हर किसी मे परमात्मा के दर्शन करे, जो घोर से भी घोर दुःखों को सुख में बदल दे,जो घोर से भी घोर पीड़ा को समाप्त करने वाला हो,जो घोर अज्ञानता को ज्ञान में परिवर्तित कर दे,जो घोर दुर्भाग्य को भाग्य में बदल दे वो अघोर शिव हैं।

अघोरी शब्द केवल भगवान शिव के लिए प्रयोग होता है अन्य किसी भी देवी देवता के लिए नही इसी कारण भगवान शिव को महादेव कहा जाता है। 

अघोर अवतार में भगवान शिव के पास एक ऐसी शक्ति है जिसे तिरोधान कहा जाता है। तिरोधान का अर्थ है कि एक ऐसी शक्ति जो समस्त ज्ञान और मानव छमता को स्वयं में समाहित करती है।

अन्य शब्दों में कहा जाये तो हम समस्त मनुष्यों की छमता का केंद्र भगवान शिव का अघोर अवतार है।

अघोर विद्या का ज्ञान भगवान शिव ने सर्वप्रथम भगवान दत्तात्रेय जी को दिया जिन्होंने अघोर पन्त चलाया। 

भगवान दत्तात्रेय जी की उपासना हमे भगवान के अघोर अवतार से जोड़कर सुख-सम्रद्धि प्रदान करती है। 

"अघोर जो घोर अज्ञानता को नष्ट कर दे" ऐसे परम् तत्व शिव को कोटि कोटि प्रणाम👏👏👏

आचार्य राहुल अस्थाना 

ज्योतिषाचार्य व आध्यात्मिक मर्मज्ञ

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