जन्माष्टमी पर श्री कृष्ण , माता त्रिपुर सुंदरी (श्री ) तथा श्री यंत्र का पूजन धनदायक होता है

 

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श्री कृष्ण और श्रीविद्या की देवी त्रिपुर सुंदरी तथा श्री यंत्र

(श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर विशेष)

 भगवान् कृष्ण का जन्म भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को रात्रि 12 बजे रोहिणी नक्षत्र में हुआ था | जन्म मथुरा में हुआ , शिक्षा उज्जैन में हुई हस्तिनापुर कर्मक्षेत्र रहा तथा द्वारिका में परमधाम को प्राप्त हुए | कहा जाता है की भगवान् कृष्ण 64 कलाओं से सम्पूर्ण थे इसी कारण उन्हें सम्पूर्ण जीवन का प्रतीक माना जाता है | शायद बहुत ही कम लोगों को ज्ञात होगा की भगवान् कृष्ण की प्रथम 16 कलाएं श्री की देवी त्रिपुर सुंदरी (षोडशी) से सम्बंधित हैं | श्री कुल की श्रेष्ठ देवी माता त्रिपुर सुन्दरी 16 वर्षायु की , 16 कलाओं वाली तथा 16 माताओं के नाम से जानी जाती हैं | माता त्रिपुर सुंदरी को ललिता ,राज राजेशवरी तथा षोडशी भी कहा जाता है | माता त्रिपुर सुंदरी और भगवान् कृष्ण दोनों ही 16 कलाओं से विभूषित हैं |

 श्री विद्या के उच्च कोटि के साधकों और अनुयायियों ने अपने ग्रंथों में यहाँ तक लिखा है कि श्री कृष्ण की प्रेयसी राधा ही त्रिपुर सुंदरी का रूप हैं | उनके अनुसार भगवान् कृष्ण को आरम्भ की 16 कलाएं माता त्रिपुर सुंदरी से ही प्राप्त हुई हैं अतः अतः अवतार लेने के उपरांत एक सम्पूर्ण स्त्री की आवश्यकता थी जिसकी पूर्ति माता त्रिपुर सुंदरी ने राधा के रूप में की |

(शायद इसी कारण श्री कृष्ण की उपासना करने वाले लोग वैभव की प्राप्ति अधिक करते हैं )

भगवान् कृष्ण की 16 कलाओं का वर्णन इस प्रकार है –

1.

श्री

 9.

प्रेरणा

2.

भू   अचल संपत्ति 

10.

ज्ञान

3.

कीर्ति

11.

क्रिया

4.

इला (वाणी )

12.

योग

5.

लीला (आनन्द )

13.

विनय

6.

कान्ति(सौन्दर्य )

14.

सत्य

7.

विद्या (शिक्षा )

15.

इसना (आधिपत्य )

8.

विमला (पारदर्शिता )

16.

अनुग्रह (उपकार )

 इसमें प्रथम कला श्री अर्थात वैभव से सम्बंधित है इसका सीधा अर्थ यही है कि जो व्यक्ति षोडश कला नायक श्री कृष्ण , षोडशी राज राजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी तथा यंत्रराज श्री यंत्र (सुमेरु के रूप में ) की उपासना करता है तो निश्चित ही उसे सत्मार्ग से 

श्री(धन ,संपत्ति ,वैभव आदि ) की प्राप्ति होती है |11 अगस्त 2020 जन्माष्टमी पर मुहूर्त और साधना विधि

 11 अगस्त को रात्रि 9:12 से 10:00 बजे तक अमृतकाल में माता त्रिपुर सुंदरी का पूजन (लक्ष्मी जी ) श्री सूक्त –कनकधारा का पाठ ,श्री यंत्र पर लक्ष्मी जी के 108 नाम से ज अक्षत से अर्चन तथा लक्ष्मी जी के मन्त्र का जप करना चाहिए |

 रात्रि 12 बजे भगवान् के जन्म के उपरांत दक्षिणावर्ती शंख से भगवान् का स्नान ,ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मन्त्र का जप, मधुराष्टकम तथा गीता का दसवां अध्याय अवश्य पढ़ना चाहिए |

सौजन्य से -

आचार्य (डा.) राहुल सुरेश चन्द्र अस्थाना


जय श्री कृष्णा      जय श्री कृष्णा      जय श्री कृष्णा       जय श्री कृष्णा

Comments

  1. बहुत ही सुंदर जानकारी

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